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Panchatantra short stories in Hindi with moral

Panchatantra short stories in Hindi with moral

Do you want to read a lot of Panchatantra short stories in Hindi with moral? Then you are in the right place!!! Who wrote the world famous Panchatantra Hindi moral stories? Why is Panchatantra so so famous in India and why are Panchatantra short stories in Hindi with moral so popular? In this section, we are going to learn about the history behind Panchatantra short stories.

Panchatantra short stories in Hindi with moral
Panchatantra short stories in Hindi with moral

Panchatantra Hindi stories with moral

  1. About Panchatantra short stories in Hindi with moral – पंचतंत्र की कहानियां हिंदी में
  2. ठग और साधु – Panchatantra short moral stories in Hindi
  3. चुहिया का स्वयंवर – Panchatantra short moral stories in Hindi
  4. एकता की शक्ति – Panchatantra short stories in Hindi for kids
  5. stories from Panchatantra in Hindi – मित्रता
  6. Hindi moral stories of Panchatantra – शेर और चूहे की कहानी – The lion and the mouse
  7. Panchatantra kahani in Hindi – बोलने वाली गुफा – The lion and the jackal
  8. कौवे की चालाकी – Panchatantra children’s hindi stories
  9. नटखट बंदर – Panchatantra children’s hindi stories
  10. Panchatantra stories in Hindi PDF version

 

About Panchatantra short stories in Hindi with moral

Before you start reading all the Panchatantra Hindi moral stories, you should first learn about the history of Panchatantra.

  • When wrote Panchatantra in Hindi? Panchatantra stories were written by Vishnu Sharma
  • When was Panchatantra written? Panchatantra stories were written in 200 BC
  • How many stories are there in Panchatantra? Panchatantra has about 300 kahani.
  • Many of the Panchatantra kahani are based on animals and birds.

Now that we have learnt about the history of Panchatantra in Hindi, let us now read some very short stories of Panchatantra in Hindi. These Panchatantra stories will be quite fun to read and interesting as well

 

ठग और साधु – Panchatantra short moral stories in Hindi

This is the first story among the great collection of Panchatantra short stories in Hindi with moral. In this wonderful kahani, a sage accepts a man as a disciple and trusts him completely without properly knowing him. What does the disciple do then? Let us now start reading the first of many Panchatantra short moral stories in Hindi

Panchatantra short stories in Hindi with moral
Panchatantra short stories in Hindi with moral

देवशर्मा नाम का एक ब्राह्ममण था। दान में मिले कपड़ों को बेचकर उसने काफी धन इकट्ठा कर लिया था। अपने धन की सुरक्षा के लिए उन्हें एक पोटली में बांधकर उसे सदा अपने साथ रखता था। किसी दूसरे पर विश्वास नहीं करता था।
अष्टभूति नामक चोर ने सदा उसे एक पोटली लिए देखकर सोचा कि यह अवश्य ही बहुमूल्य है, इसे चुराना चाहिए। पहले मैं इसका विश्वास जीतता हूं फिर इसे ठगूंगा।
एक दिन वह देवशर्मा के पास गया और बोला, ‘संत, आपका अभिवादन है। मैं अनाथ हूं। मुझे शिष्य स्वीकार करें। आजन्म मैं आपकी सेवा करूंगा।’ देवशर्मा ने प्रसन्न होकर कहा, ‘ठीक है, मैं तुम्हें शिष्य बनाता हूं पर एक शर्त है- मेरी पोटली को हाथ भी नहीं लगाओगे।’
अष्टभूति देवशर्मा के साथ स्वामीभक्त शिष्य की भांति रहने लगा। एक दिन किसी पुराने शिष्य का निमंत्रण स्वीकार कर दोनों उसके घर पहुंचे। वहां कमरे में स्वर्ण मुहर पड़ी हुई मिली। अष्टभूति ने मालिक का विश्वास जीतने के लिए कहा, ‘श्रीमान् क्षमा करें, यह मुहर तो हमारी नहीं है। हमें इसे दे देना चाहिए।‘
अष्टभूति की ईमानदारी से देवशर्मा अभिभूत होकर म नही मन सोचने लगा, ‘यह तो बहुत ही ईमानदार व्यक्ति है। अब मुझे भय नहीं है। यह मेरा धन नहीं चुराएगा।‘
वापस लौटते समय एक नदी पड़ी। देवशर्मा ने नहाने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा, ‘पुत्र! मैं नहाना चाहता हूं। तुम मेरी गठरी और पोटली का ख्याल रखो।‘ यह कहकर देवशर्मा नहाने चला गया।
अष्टभूति ने धन की पोटली उठाई और चंपत हो गया।
नदी के दूसरे किनारे पर बकरियाँ आपस में लड़ रही थीं।
देवशर्मा उसी दृश्य को देख रहा था। नहाकर जब किनारे आया तो अपनी पोटली और अष्टभूति को वहां न पाकर उसने पहले पुकारा फिर समझ गया कि वह ठगा गया है। एक अनजान पर विश्वास करने के कारण उसे धोखा मिला था, उसकी सारी सम्पति जा चुकी थी।

Moral of the Panchatantra story in Hindi:

शिक्षा : शीघ्र ही किसी पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

 

Panchatantra short moral stories in Hindi  – चुहिया का स्वयंवर

This is the second story among the great collection of Panchatantra short stories in Hindi with moral. In this wonderful Panchatantra moral story for children, a sage transforms a mouse into a girl and wants to make her happy by getting her married. Who does the mouse girl want to marry? Will she ever truly want to become a human? Let us now start reading the first of many Panchatantra short moral stories in Hindi.

Panchatantra Hindi short stories
Panchatantra Hindi short stories

गंगा नदी के किनारे तपस्वियों का एक आश्रम था। वहाँ याज्ञवलक्य नाम के मुनि रहते थे। मुनिवर एक दिन नदी के किनारे जल लेकर आचमन कर रहे थे कि उनकी अंजुली में, बाज के चोंच से छुटकर, एक चुहिया गिर पड़ी।

मुनि ने अपने प्रताप से उसे एक सुंदर कन्या में बदल दिया और अपने आश्रम ले आए। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा, “इसे प्रेम से अपनी बच्ची की तरह पालो।”

मुनि पत्नी उसे पाकर बहुत प्रसन्न हुई और बड़े प्यार से उसका लालन-पालन किया। ज बवह विवाह योग्य हो गई तब उन्होंने मुनि से योग्य वर ढूंढकर उसके हाथ पीले करने के लिए कहा।

मुनि ने तुरंत सूर्य देव को बुलाकर अपनी कन्या से पूछा, ‘पुत्री! त्रिलोक को प्रकाशित करने वाला सूर्य क्या तुम्हें पतिरूप में स्वीकार है?‘

पुत्री ने मना करते हुए कहा, “नहीं, इनके तेज के कारण मैं इनसे आंख नहीं मिला सकती।”

मुनि ने सूर्य देव से पूछा, “आप अपने से अच्छा कोई वर सुझाएं।” सूर्यदेव ने कहा, “मुझसे अच्छे मेघ हैं वह मेरे प्रकाश को भी ढक देते हैं।”

मुनि ने मेघ को बुलाकर पुत्री से पूछा कि क्या वह उसे पसंद हैं? कन्या ने उसे काला कहकर मना कर दिया। मुनि ने मेध से कहा, “कृपया, अपने से शक्तिशाली वर बताएं।” मेघ ने कहा कि पवन उनसे अधिक ताकतवर है। “यह तो बड़ा चंचल है” यह कहकर कन्या ने मना कर दिया।

मुनि ने पवन से उत्तम वर के लिए पूछा तो उन्होंने कहा पर्वत मुझसे अधिक अच्छा है। मुनि ने पर्वत को बुलाकर कन्या की राय जानी तो उसने कहा, “यह तो बड़ा कठोर और गंभीर है।” मुनि ने पर्वत से अधिक योग्य कौन है जब पूछा तो उसने उत्तर दिया, “श्रीमान! मुझसे अच्छा चूहा है जो मुझे खोदकर बिल बना लेता है।”

मुनि ने मूषकराज को बुलाया। उसे देखकर कन्या बहुत प्रसन्न हुई और बोली, “पिताजी! मुझे मूषिका बनाकर मूषकराज को सौंप दीजिए।” मुनि ने पुनः उसे चुहिया बना दिया और चूहे के साथ विवाह कर दिया।

Moral of the Panchatantra story in Hindi:

शिक्षा: जो जैसा है वैसा ही रहता है।

 

 

Panchatantra short stories in Hindi for kids – एकता की शक्ति

WHHHOHOOOO!!!! AWESOME!!! Let us now proceed to the third Panchatantra story in Hindi! In this Panchatantra kahani, a turtle, a crow, a rat and a deer were best friends and always used to spend time with each other. One day the deer gets caught with a hunter. Let us now learn about how the friends team up together and trick the hunter in this Panchatantra Hindi moral short story!

Panchatantra short stories in Hindi for kids – एकता की शक्ति
Panchatantra short stories in Hindi for kids – एकता की शक्ति

एक दिन एक तालाब के किनारे मंथरक (कछुआ), लघुपतनक (कौआ) और हिरण्यक (चूहा) बैठे आपस में बातें कर रहे थे। तभी शिकारी से बचता बचाता चित्रांग (हिरण) वहाँ आया और उनका मित्र बनकर उनके साथ रहने लगा।

एक दिन हिरण अपना खाना ढूंढकर शाम को जब वापस नहीं आया तो सभी मित्र चिंतित हो गए। सबकी सलाह से कौए ने आसमान में उड़कर उसे ढूँढना शुरू किया। हिरण ने कौए को देखा तो चिल्लाकर बोला, “शिकारी के आने से पहले कृपया जाल से मुझे निकालो।”

कौआ दोस्तों के पास पहुंचा। सारी बात उन्हें बताई और चूहे को हिरण के पास ले गया। अपने पैने दाँतों से चूहे ने जाल काट दिया। इसी बीच रेंगता-रेंगता कछुआ भी वहां पहुंच गया था।

तभी शिकारी आया और जाल कटा तथा हिरण को गायब देखा। शिकारी को देखते ही सभी जान बचाकर भागे। कौआ उड़ गया, चूहा पत्थरों के पीछे छुप गया और हिरण ने जंगलों की ओर छलांग लगाई पर कछुआ पकड़ा गया। उसे थैले में बंद कर शिकारी चल पड़ा।

अब कछुए को बचाने की सलाह की गई। कौए ने उपाय बताया, “हिरण भाई, तुम तालाब के पास मृतप्राय लेट जाओ। मैं तुम्हारी आँख निकालने का नाटक करूँगा। शिकारी तुम्हें मृत समझकर, थैला छोड़कर पकड़ने आएगा। तुम चौकड़ी भरकर भाग लेना। तभी चूहा थैला कुतरकर कछुए को बचा लेगा।”

कौए के बताए उपाए के अनुसार हिरण मृतप्राय लेट गया। शिकारी ने उसे मृत समझकर थैला रखा और हिरण को लेने दौड़ा। शिकारी को पास आता देखकर हिरण उठा औ बिजली की गति से जंगलों में भाग गया। निराश शिकारी वापस अपने थैलों के पास आया। थैला कुतरा हुआ था और कछुआ गायब… उसके दुःख की सीमा न रही।

इधर, चारों मित्र हिरण्यक, मन्थरक, लघुपतनक और चित्रांग फिर से साथ होकर बहुत प्रसन्न थे।

 

Moral of the Panchatantra story in Hindi:

शिक्षा: संघ में बहुत शक्ति होती है।

 

Panchatantra stories in Hindi – मित्रता

Welcome to the fourth Panchatantra short story in Hindi! In this children’s story about friendship and intelligence, a few pigeons get caught in a net and are trapped. How do they escape? Let us now start reading the fourth of many Panchatantra short moral stories in Hindi.

Panchatantra stories in Hindi
Panchatantra stories in Hindi

महिलारोप्य नाम का एक शहर था। वहाँ बरगद के एक पेड़ पर लघुपतनक नाम का एक कौआ रहता था। एक दिन वह भोजन की खोज में जा रहा था तभी जाल लेकर एक शिकारी को पेड़ की ओर आता देखा। शिकारी ने पेड़ के नीचे जाल फैलाकर अनाज के दाने बिखेर दिए।
उसी समय चित्रग्रीव नाम का एक कबूतरों का राजा, अपने कबूतर दल के साथ, उड़ता हुआ वहाँ आया। बिखरे हुए अनाज के दानों को देखकर कबूतर अपना लोभ न रोक सके और दाने चुगने नीचे उतर आए। पेड़ के पीछे छुपे हुए शिकारी ने जाल को खींचा लिया और सभी कबूतर जाल में फँस गए। चित्रग्रीव बहुत ही चतुर था। उसने शेष कबूतरों से कहा, “मित्रों डरो मत! ळमलोग एक साथ जाल लेकर उड़ जाएँगे और सुरक्षित स्थान पर चले जाएँगे जहाँ शिकारी न आ पाए। तैयार हो जाओ, एक…दो…तीन।” सभी कबूतर एकसाथ जाल लेकर उड़ गए।

शिकारी ने काफ़ी दूर तक उनका पीछा किया पर वे आँखों से ओझल हो गए। शिकारी के लौट जाने पर चित्रग्रीव ने कबूतरों से कहा, “चलो हमसब महिलारोप्य शहर चलें जहाँ मेरा मित्र हिरण्यक चूहा रहता है। इस जाल के बाहर निकलने में वह हमारी सहायता करेगा।” वहाँ पहुंचकर चित्रग्रीव ने आवाज़ दी “मित्र हिरण्यक, कृपया बाहर आओ। मैं तुम्हारा मित्र चित्रग्रीव कठिनाई में हूं, हमारी सहायता करो।”
हिरण्यक अपने मित्र को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ और बोला, ठीक है, तुम राजा हो इसलिए मैं पहले तुम्हें बाहर निकलने में सहायता करूँगा फिर शेष कबूतरों को। चित्रग्रीव ने हिरण्यक को मना करते हुए कहा, “कृपया, पहले मेरे मित्रों के बंधन काटो। अपने लोगों का ख्याल रखना राजा का प्रथम कर्तव्य है।”
चित्रग्रीव का प्रेम देखकर हिरण्यक बहुत प्रसन्न हुआ और बोला “मैं राजा का कर्म और कर्तव्य जानता हूं। मैं सभी के बन्धन काट दूंगा।”
हिरण्यक ने अपने साथी चूहों के साथ मिलकर, अपने तीखे दाँतों से पूरे जाल को काट डाला और सभी कबूतरों को आज़ाद कर दिया। चित्रग्रीव ने हिरण्यक और उसके साथियों का धन्यवाद किया और अपने दल के साथ उड़ गया।

 

Moral of the Panchatantra story in Hindi:

शिक्षा:  आवश्यकता पड़ने पर सहायता करने वाला मित्र ही सच्चा मित्र है।

 

Panchatantra Hindi moral stories – शेर और चूहे की कहानी – The lion and the mouse

Now on to story five of the Hindi Panchatantra stories! In this short story, a lion and a mouse encounter each other and the lion lets the mouse go thinking that he is too small. In the end the mighty lion is saved by the tony mouse! How did this happen? Let us now start reading the fifth of many Panchatantra short stories in Hindi with moral.

The lion and the mouse
The lion and the mouse

एक समय की बात है। एक जंगल में बहुत ही खतरनाक शेर रहता था। उसका नाम खड़क सिंह था। उससे जंगल के सारे जानवर बहुत ही डरते थे।
एक दिन की बात है, वह भर पेट भोजन करके एक पेड़ के नीचे बहुत ही गहरी नींद में सोया हुआ था। शेर जहां सोया हुआ था उससे कुछ ही दूरी पर एक चूहे का बिल भी था। शेर के खर्राटों से डर कर जब चूहा अपने बिल से बाहर निकला तो पहले उसे देखकर थोड़ा डरा लेकिन फिर वह सोचने लगा – “अभी तो यह गहरी नींद में खर्राटे भर रहा है इसलिए अभी तो यह मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। चलो कुछ मस्ती ही कर लूं। वैसे भी इसके खर्राटों ने मेरी नींद खराब कर दी है।”
चूहा यह सोचकर सोते हुए शेर के ऊपर चढ़कर उछलने लगा। एक दो बार तो खड़क सिंह ने अपनी पूछ मार कर चूहे को भगा दिया। पर मस्ती करने के लिए चूहा फिर उसके नाक पर चढ़ गया।

तभी खड़क सिंह की आंख खुल जाती है और अपने आस-पास चूहे को मस्ती करता देख उसे बहुत क्रोध आता है और वह चूहे को अपने आगे के पंजे में जकड़ लेता है, और जोर से दहाड़ते हुए चूहे से बोलता है, “शैतान चूहे तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी नींद खराब करने की। अब मैं तुम्हे नहीं छोडूंगा। मैं तुम्हे खा जाऊंगा।”
यह बात सूनकर चूहे की हालत खराब हो गई। उसका हाल बुरा हो गया और उसके पीसने छुटने लगे। वह कांपती आवाज़ में खड़क सिंह से बोलता है –
“आप इस जंगल के राजा है, महाराजा है। मुझे आप पागल समझकर ही क्षमा कर दे। मुझ जैसे छोटे से जानवर को मारकर अपकी शान नहीं बढ़ेगी। बल्कि सारे जंगल के जानवर यही बोलेगें कि महाराजा खड़क सिंह ने एक छोटे से चूहे को एक छोटी सी गलती के लिए मार डाला।”
चूहे की यह बात सुनकर शेर ने अपनी गरदन हिलाई लेकिन बोला कुछ नहीं।
फिर चूहे ने बोला – “मुझे जाने दीजिए महाराज। मुझे मत मारिये महाराज। मैं वादा करता हूं, कि आज आप मुझे छोड़ देगें तो जीवन में कभी न कभी आपकी सहायता जरूर करूंगा।”
चूहे की यह बात सुनकर शेर जोर-जोर से ठहाके मार कर हँसने लगा और फिर बोला – “तुम्हारे जैसा छोटा सा चूहा मेरी क्या मदद करेगा। तुम्हारी यह बात सुनकर मुझे इतनी हंसी आ रही है जितनी आज तक नहीं आई। खैर, मैं तुम्हे छोड़ता हूं। तुमने आज मुझे बहुत हंसाया है। इसी का इनाम तुम्हारी जिंदगी है।”
यह कहते हुए शेर ने चूहे को छोड़ दिया। चूहा गिरते-पड़ते वहां से भाग गया।
इस घटना के कई दिनों के बाद कुछ शिकारी शेर को पकड़ने के लिए जंगल में आए। उन्होंने शेर को पकड़ने के लिए एक मजबूत जाल बिछाई।
एक दिन शेर उसी रास्ते से गुजर रहा था, जिस रास्ते में जाल बिछा हुआ था और बदकिस्मती से शेर उसी जाल में फंस गया। शेर ने उस जाल से निकलने की बहुत कोशिश की लेकिन वह निकल ही नहीं पाया। शेर जोर-जोर से दहाड़ मारने लगा।
“कोई है इधर? क्या कोई मेरी मदद कर सकता है?”
तभी चूहा वही से गुजर रहा था। वह शेर की आवाज़ सुनकर तुंरत शेर के पास आ जाता है और बोलता है-
‘ये कैसे हो गया महाराज? आप कैसे इस जाल में फंस गये। पर आप चिंता न करें मैं अभी अपने पैने दांतों से इस जाल को कुतर डालूंगा। आपको डरने की जरूरत नहीं। यह कहकर चूहे ने जल्दी-जल्दी उस जाल को कुतरना शुरू कर दिया। जल्दी ही शेर जाल से मुक्त हो गया।‘
फिर चूहा शेर से बोला – “उस दिन आप मुझ पर हंस रहे थे न महाराज, मैंने आपसे कहा था न किसी न किसी दिन मैं आपकी सहायता जरूर करूंगा। अब आपको यह तो समझ आ गया होगा कि एक छोटा और कमजोर प्राणी भी आपकी मदद कर सकता है।”
इस पर शेर बोला – “हाँ, दोस्त आज से तुम मेरे खास दोस्त हो। आज तुमने मुझे जीवन का पाठ पढ़ाया है।”

Moral of the Panchatantra story in Hindi:

शिक्षा:  इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी को भी छोटा और कमजोर नहीं समझना नहीं चाहिए। ईश्वर के बनाये हरेक प्राणी का अपना महत्व है। जो काम सुई कर सकती है वो काम तलवार नहीं कर सकती और जो तलवार कर सकती है वो सुई नहीं। तो बच्चों दोनों का अपना.अपना महत्व है।

 

Panchatantra kahani in Hindi – बोलने वाली गुफा  – The lion and the jackal

This is probably one of the most famous Panchatantra stories of all time! In this short Tamil story, a lion hides in a cave and tries to trick a jackal into coming in. The jackal however is very smart and uses his wits to figure out the truth! Let us now start reading the sixth of many Panchatantra moral stories in Hindi.

Panchatantra kahani in Hindi
Panchatantra kahani in Hindi

एक जंगल में खरनख नाम का शेर रहता था। एक बार बहुत दौड़-धूप करने के बाद भी उसे कोई शिकार न मिला। उसे एक बहुत बड़ी गुफा दिखाई दी।

गुफा के भीतर जाकर उसने सोचा कि रात बिताने के लिए कोई जानवर गुफा में अवश्य आएगा, उसे मारकर भूख मिटाऊंगा। जब तक इस गुफा में ही छिपकर बैठता हूं।

थोड़ी देर में गुफा में रहने वाला दधिपुच्छ नाम का गीदड़ वहाँ आ गया। उसने गुफा के बाहर शेर के पद चिह्न देखे। पद चिह्न भीतर तो गए थे पर बाहर नहीं आए थे। गीदड़ ने सोचा कि अवश्य ही कोई शेर भीतर है। अपनी शंका की सत्यता जानने के लिए उसने एक युक्ति लगाई।

उसने बाहर से ही गुफा को पुकारा, “गुफा, ओ गुफा! देखो तुम्हारा मित्र अपने वादे के अनुसार तुमसे मिलने आया है। तुम कैसी हो?”

गुफा से कोई उत्तर न पाकर गीदड़ ने एक बार फिर गुफा को आवाज दी।

शेर ने सोचा कि यह गुफा शायद आज मेरे डर से नहीं बोल रही है। मेरे चुप रहने से गीदड़ को संदेह हो जाएगा….और शेर गरज उठा।

शेर की गर्जना से गुफा गूंज उठी।

गीदड़ को शेर के होने का पता चल गया और वह सिर पर पैर रखकर भाग खड़ा हुआ।

 

Moral of the Panchatantra story in Hindi:

शिक्षा:  संकट सामने पाकर दुःखी होने की जगह बुद्धी से उसे दूर करना चाहिए।

 

 

कौवे की चालाकी  – Panchatantra children’s hindi stories

Great!! We are not done with 6 stories in Panchatantra kahani in Hindi. The seventh story is called “The Owls and the Crows”. In this hindi short story, there is a great war between the owls and the crows and the owls were very powerful and cruel. One day the crows have had enough and decide to end the war by tricking the owls. Read more to see what happens!

Panchatantra children’s hindi stories
Panchatantra children’s hindi stories

कौवों का राजा मेघवर्ण एक बहुत बड़े बरगद के पेड़ पर सैंकड़ों कौवों के साथ रहता था। उलूकराज अपने पूरे वंश दल के साथ पास की पहाड़ी की गुफा में रहते थे। पुराने वैर के कारण अपने मार्ग में आने वाले प्रत्येक कौवे को वे मार दिया करते थे।

स्थिरजीवी मेघवर्ण का सबसे पुराना मंत्री था। उल्लुओं को अपने मार्ग से हटाने के लिए उसने एक युक्ति बनाई। उसने मेघवर्ण से कहा, “तुम मुझसे लड़कर, मुझे लहूलुहान करने के बाद इसी वृक्ष के नीचे फेंककर स्वयं सपरिवार पर्वत पर चले जाओ। मैं उल्लुओं का विश्वासपात्र बनकर अवसर पाकर सबका नाश कर दूंगा।”

मेघवर्ण ने ऐसा ही किया। स्थिरजीवी को अपनी चोंचों के प्रहार से घायल कर वहीं फेंक दिया और स्वयं सभी कौवों के साथ पर्वत पर चला गया। यह समाचार तुरंत उलूकराज के सामने लाया गया। वह रोते तथा कांपते हुए बोला, “राजन्! मैं मेघवर्ण का मुख्यमंत्री स्थिरजीवी हूं। मैंने आपकी थोड़ी तारीफ क्या कर दी मुझे पीटकर राज्य से निष्कासित कर दिया। अब मैं आपको मेघपूर्ण के सारे राज बताऊंगा जिससे आप सारे कौवों का नाश कर पाएं।” उल्लूकराज का मंत्री रक्ताक्ष बीच में बात काटकर तुरंत बोला, “स्वामी! इसपर विश्वास मत कीजिए। यह हमारा शत्रु है इसे मारने में ही भलाई है।” शेष मंत्री इस बात से सहमत न हुए। एक बुजुर्ग उल्लू ने सलाह दी, “मुझे लगता है यह कौआ बड़े काम का साबित होगा।”

इन तर्कों से सहमत होकर उलूकराज ने स्थिरजीवी को नहीं मारा।

थोड़ा ठीक होने पर स्थिरजीवी ने उलूकराज से कहा, “महाराज, मैं आत्मदाह करके उल्लू का जन्म लेना चाहता हूं जिससे मेघवर्ण से बदला ले सकूं। आप मुझे लकड़ियां इक्ट्ठी करने की अनुमति दीजिए।”

रक्ताक्ष स्थिरजीवी की सच्चाई जानता था। उसने विरोध किया पर किसी ने उसकी बात न सुनी। वह अपने कुछ उल्लू साथियों के साथ वहां से दूसरी जगह चला गया।

गुफा के मुंह पर स्थिरजीवी ने ढेर सारी लकड़ियां इक्ट्ठी करीं और फिर मेघवर्ण के पास जाकर बोला, “मशाल लेकर दिन में आना। गुफा के द्वार पर इकट्ठी लकड़ियों पर डाल देना।”

स्थिरजीवी ने जैसा कहा था कौवों ने वैसा ही किया। गुफा के दरवाजे पर लकड़ियां जल उठीं और सभी उल्लू भीतर ही फंस कर भस्म हो गए। मेघवर्ण अपने अनुयायियों के साथ वापस बरगद के पेड़ पर आ गया और सूखपूर्वक रहने लगा।

Moral of the Panchatantra story in Hindi:

शिक्षा: शत्रु की शक्ति को समझकर ही युद्ध करना चाहिए।

 

नटखट बंदर – Panchatantra children’s hindi stories

FANTASTIC!! You have completed 7 Panchatantra short stories in Hindi and have also read their moral. The eighth story is called “The naughty monkey”. In this short Panchatantra moral story, there is a very naughty monkey who is playing tricks on everyone and one day he suffers the consequences of his actions. Read more to see what happens!

नटखट बंदर
नटखट बंदर

एक गांव में एक आम के वृक्ष पर ढेर सारे बंदर रहते थे। उनमें से एक बंदर बड़ा नटखट था। उसे लोगों को परेशान करने में बड़ा मजा आता था। लोगों की चीजों से वह खेला करता था। शेष सभी बंदर खाते और मस्त रहते थे।

एक बार कम वर्षा के कारण गांव में सूखा पड़ा। गांववालों ने मंदिर बनवाने का विचार किया और सभी निर्माण कार्य में लग गए।

एक दिन दोपहर में बढ़ई लोग काम छोड़कर खाना खाने गए थे। तभी नटखट बंदर अपने मित्रों के साथ वहां आ गया। उसने लकड़ी का एक लट्ठा देखा जिसे गुटके के सहारे खड़ा किया हुआ था। नटखट बंदर को कुछ समझ नहीं आया। उसने म नही मन सोचा, “यह है क्या? एक गुटके के साथ इसे फंसाकर इन्होंने क्यों रखा हुआ है। अगर मैं इसे निकालूं तो क्या होगा?”

नटखट बंदर लट्ठे पर बैठकर उसे हिलाने लगा और गुटका निकालने की चेष्टा करने लगा। हिलते-हिलते गुटका निकल आया। लट्ठा भारी थी, खड़ा नहीं रह पाया। गिर गया और बंदर का पैर फंस गया। दर्द से बंदर कराहने लगा। उसकी शरारत का फल उसे मिल गया था।

Moral of the Panchatantra story in Hindi:

शिक्षा: हर जगह अपनी नाक नहीं डालनी चाहिए और बिना सोचे-समझे कोई काम न करें।

 

Panchatantra stories in Hindi PDF

This set of Panchatantra stories in Hindi PDF edition has been curated so that you can read it whenever you want without worrying about internet connection! The Panchatantra stories in Hindi PDF edition contains 8 very famous Panchatantra short stories in Hindi and it quite a simple and fun read for any children, kids or adults!

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